पुरुषोत्तम मास को मलमास या अधिकमास भी कहा जाता है।
इस साल अधिकमास 18 जुलाई से आरंभ होगाया है और 16 अगस्त को यह समाप्त हो जाएगा।
सौर वर्ष और चन्द्र वर्ष में सामंजस्य स्थापित करने के लिए हर तीसरे साल के पंचांगों में एक चन्द्र- मास बढ़ जाता है। इसे ही अधिक मास या मलमास कहते हैं।
सूर्य वर्ष में 365 दिन होते हैं और चंद्र वर्ष में 354 दिन होते हैं। इस तरह से एक साल में चंद्र और सूर्य वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है और तीन साल में यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है। यही 33 दिन तीन साल बाद एक अतिरिक्त माह बन जाता है। इसे ही अधिकमास का नाम दिया गया है।
अधिकमास के कारण काल गणना को उचित रूप से बनाए रखने में मदद मिलती है, जिससे व्रत-त्योहारों की तिथि अनुकूल रहती है।
हिंदू धर्म के अनुसार, संसार के प्रत्येक जीव पंचमहाभूतों (जल, अग्नि, आकाश, वायु और पृथ्वी) से मिलकर बना है. अधिकमास ही वह समय होता है, जिसमें धार्मिक कार्यों के साथ चिंतन-मनन, ध्यान, योग आदि के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर में समाहित इन पंचमहाभूतों का संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
मलमास के दौरान किसी प्रकार के शुभ कार्य जैसे- शादी-विवाह, मुंडन, अन्नप्राशन संस्कार, गृह प्रवेश, भूमि पूजन आदि वर्जित होते हैं। साथ ही मलमास में नए घर का निर्माण शुरू नहीं करना चाहिए। इस दौरान नया काम या व्यापार भी नहीं शुरू करना चाहिए। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय ” का जाप करते रहें🕉️।
अधिक मास में जप,तप व्रत-उपवास दान महामृत्युंजय मंत्र जाप शिव पूजन श्रीमद् भागवत कथा श्रवण पित्रों का श्राद्ध कर्म आदि करना श्रेयस्कर माना गया है ।
