22मार्च 2023बुधवार से वासन्त नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है। सनातन धर्मावलंबियों हम सबका नव वर्ष विक्रम संवत्सर २०८० (नल नामक संवत्सर)का प्रारंभ भी आज के दिन ही होता है।
इस, वर्ष एक दिन पूर्व रात्रि से ही प्रतिपदा तिथि लग रही है जो कि 22मार्च बुधवार को रात्रि 9:28बजे तक रहेगी ,प्रथम दिवस के ब्रह्ममुहूर्त से ही मां की आराधना से नव वर्ष का उत्सव प्रारंभ हो जाता है अतः ब्रह्म मुहूर्त भोर 3:50से लेकर दिवस पर्यन्त सूर्यास्त काल 6:00बजे तक में किसी भी समय कलश स्थापन, दुर्गा जी का पूजन तथा दुर्गा पाठ प्रारंभ किया जा सकता है , इसमें अलग से किसी भी प्रकार का मुहूर्त या समय देखने की आवश्यकता नहीं है ।
आजकल सोशल मीडिया के तथा कथित ज्योतिषियों के द्वारा अपने वैशिष्ट्य मात्र के लिए कलश स्थापना का कोई न कोई मुहूर्त या समय बता दिया जाता है ,उस पर ध्यान न देते हुए अपनी सुविधानुसार दिवस पर्यन्त कभी भी कलश स्थापना तथा पूजन पाठ करें।
28मार्च मंगलवार को निशीथकाल में अष्टमी होने से इस दिन रात्रि जागरण तथा मंत्र ,यंत्र की सिद्धिकरें,यह तांत्रिकों की साधना का उत्तम काल है।
महा अष्टमी व्रत 29मार्च को किया जाएगा इसी दिन बटुक कुमारी पूजन तथा उनको भोजन कराना उपयुक्त रहेगा यद्यपि नवरात्र के किसी भी दिन कुमारियों को भोजन कराया जा सकता है।अष्टमी व्रत का पारण 30मार्च को प्रातः काल किया जाएगा ।
महानवमी ,श्रीरामनवमी का व्रत तथा दुर्गापाठ का हवन और समापन भी 30मार्च गुरुवार को होगा जबकि महानवमी व्रत ,रामनवमी व्रत तथा नौ दिन नवरात्र व्रत का पारण 31मार्च शुक्रवार को प्रातः काल किया जाएगा।

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